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केरल स्टोरी के बाद अब बंगाल डायरी पर बवाल, ट्रेलर में दावा- बहुमत के बाद लागू होगा शरियत कानून

By Dinesh chourasiya

 

हिंदू और मुसलमान को लेकर एक और फिल्म रिलीज के लिए तैयार है। ‘द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल’ की रिलीज से पहले ही इसके ट्रेलर बवाल मचा हुआ हैं

अभी तक द केरल स्टोरी का विवाद थमा भी नहीं है कि इसी बीच अब एक और फिल्म विवादों में आती हुई नजर आ रही है। फिल्म ‘द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल’ का ट्रेलर रिलीज होते ही चर्चा में बना हुआ है। इस ट्रेलर को लेकर लोगों में आक्रोश का माहौल बन रहा है। आलम ये है कि फिल्म के डायरेक्टर को पश्चिम बंगाल पुलिस ने नोटिस जारी कर दिया है। डायरेक्टर पर आरोप है कि वह अपनी फिल्म के जरिए बंगाल की छवि बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

अब सवाल यह है कि जिस फिल्म के ट्रेलर पर ही इतना विवाद शुरू हो रहा है, तो उसकी कहानी क्या है? ‘द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल’ का ट्रेलर हिंदुओं के साथ हुए अन्याय पर केंद्रित है। फिल्म के मेकर जितेंद्र त्यागी उर्फ वसीम रिजवी की फिल्म ‘द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल’ पश्चिम बंगाल के हालात और वहां की राजनीति के बदलते हुए हालातों पर आधारित है। ट्रेलर की शुरुआत होते ही एक डायलॉग सुनने को मिलता है कि लोकतंत्र जनता द्वारा चुनी गई सरकार, लेकिन इसका एक मतलब ये भी है कि बहुमत अगर मुस्लमानों का होगा तो कानून भी शरियत का होगा।

l इसके बाद तुरंत ममता बनर्जी का किरदार निभाती हुई एक महिला नजर आती हैं जो CAA और NRC को जोर से बोलती हुई दिखाती देती है। ट्रेलर में पश्चिम बंगाल के दिन पर दिन बदतर होते जा रहे हालातों की झलक दिखाई गई है, लोगों का पलायन दिखाया गया है। फिल्म के ट्रेलर के मुताबिक बड़ी संख्या में बांग्लादेश के कट्टरपंथी संगठन रोहिंग्या मुसलमानों को पश्चिम बंगाल में बसाया जा रहा है।

कहानी के मुताबिक पश्चिम बंगाल अब कश्मीर से ज्यादा बदतर होता जा रहा है, असम के हिंदूओं के लिए पश्चिम बंगाल दूसरा कश्मीर बन गया है। यानी मेकर्स ने इस ट्रेलर के जरिए ये दिखाने की कोशिश की है कि किस तरह से पश्चिम बंगाल में हिंदुओं का उत्पीड़न किया जा रहा है और ये उत्पीड़न करने वाले कोई और नहीं बल्कि वे ऐसे मुसलमान हैं जो कि कट्टरपंथी मानसिकता रखते हैं।

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