
रक्षाबंधन का पवित्र त्यौहार है, जिस पर भद्रा का साया है।







श्रीमहाकाल ज्योतिष कार्यालय, उज्जैन ने भी भद्रा की स्थिति बताई है। उनके अनुसार मामले पर चिन्तामणि शास्त्र के अनुसार जब भद्राकाल प्रारंभ होता है तो इसमें शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। यहां तक कि यात्रा की शुरूआत पर भी मनाही है, यानि यात्रा शुरू नहीं करनी चाहिए। इसके साथ ही भद्राकाल में राखी बांधना भी शुभ नहीं माना गया है।
चंद्रमा की राशि से भद्रा का वास तय
शास्त्रों में मान्यता के अनुसार चंद्रमा की राशि से भद्रा का वास तय किया जाता है। गणना के अनुसार चंद्रमा जब कर्क राशि, सिंह राशि, कुंभ राशि या मीन राशि में होता है। तब भद्रा का वास पृथ्वी में निवास कर मनुष्यों को क्षति पहुंचाती है।




भद्रा स्वर्गलोक में भी कार्यों में विघ्न डालती है
वहीं मेष राशि, वृष, मिथुन और वृश्चिक राशि में जब चंद्रमा रहता है तब भद्रा स्वर्गलोक में रहती है एवं देवताओं के कार्यों में विघ्न डालती है। जब चंद्रमा कन्या राशि, तुला राशि, धनु राशि या मकर राशि में होता है तो भद्रा का वास पाताल लोक में माना गया है। भद्रा जिस लोक में रहती है वहीं प्रभावी रहती है।
इनके अनुसार दिनभर है शुभ मुहूर्त
इस साल सावन मास की पूर्णिमा तिथि 30 अगस्त को शुरू हो रही है। इस दिन राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 9 बजकर 03 मिनट के बाद का है। वहीं सावन मास की पूर्णिमा तिथि का समापन 31 अगस्त को सुबह 7 बजकर 05 मिनट पर होगा। 30 अगस्त को भद्रा काल की समाप्ति रात 9 बजकर 03 मिनट पर होगी। जबकि भद्रा पुंछ 30 अगस्त को शाम 5 बजकर 30 मिनट से शाम 6 बजकर 31 मिनट तक है। इसके अलावा इस दिन भद्रा मुख शाम 6 बजकर 31 मिनट से रात 8 बजकर 11 मिनट तक है।
चंद्रमा कुंभ में स्थित हो जाएगा तो..
पंडित हर्षित कुमार पाण्डेय के अनुसार 30 अगस्त 2023 को प्रात: 10.19 तक चंद्रमा मकर राशि में स्थित है। इसके उपरांत चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित हो जाएगा तो भद्रा का अशुभ प्रभाव मृत्युलोक अर्थात् धरती पर रहेगा। ऐसा स्थिति में कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है।








