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डोंगरगढ़ मां बम्लेश्वरी मंदिर में मुर्गे की बलि:ट्रस्ट की शिकायत पर, आरोपी गिरफ्तार,आदिवासी समाज ने आंदोलन की चेतावनी दी

By Dinesh chourasiya

माँ बम्लेश्वरी मंदिर एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। कथित मुर्गे की बलि और बैगा पद्धति से पूजा के मामले ने डोंगरगढ़ में वर्षों से चले आ रहे मंदिर ट्रस्ट और आदिवासी गोंड समाज के विवाद को फिर हवा दे दी है।

राज बैगा किशोर नेताम की गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र का माहौल गर्म हो गया है और आदिवासी समाज खुलकर विरोध में उतर आया है।

पुराने रोपवे के पास हुई पूजा, बलि का आरोप

जानकारी के मुताबिक 19 मई को मां बम्लेश्वरी के ऊपरी मंदिर परिसर में पुराने रोपवे के पास एक चट्टान को ‘गढ़ माता’ मानकर बैगा पद्धति से पूजा-अर्चना की गई थी। इसी दौरान कथित तौर पर मुर्गे की बलि देने का आरोप लगा।

घटना के बाद मंदिर ट्रस्ट समिति के अध्यक्षमनोज अग्रवाल ने डोंगरगढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि इस घटना से मंदिर की पवित्रता और धार्मिक मर्यादा भंग हुई है और करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं।

ट्रस्ट बोला- केवल वैदिक परंपरा से पूजा की अनुमति

मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि धाम में केवल सनातन वैदिक परंपरा के अनुसार पूजा की अनुमति है और किसी भी प्रकार की बलि प्रथा स्वीकार नहीं की जा सकती।

आदिवासी समाज में नाराज़गी

गिरफ्तारी के बाद आदिवासी और गोंड समाज में नाराज़गी बढ़ गई है। समाज के लोगों का कहना है कि मां बम्लेश्वरी धाम से उनकी आस्था और बैगा परंपरा का संबंध सदियों पुराना है।

समाज का दावा है कि पहाड़ी और शक्तिपीठों में लोक परंपरा के अनुसार पूजा होती रही है और अब उसी परंपरा को अपराध बताकर कार्रवाई की जा रही है।

वर्षों पुराना है विवाद

डोंगरगढ़ में मंदिर ट्रस्ट और आदिवासी समाज के बीच यह विवाद नया नहीं है। पिछले कई वर्षों से ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व, पूजा अधिकार और पारंपरिक व्यवस्थाओं को लेकर दोनों पक्षों के बीच खींचतान चल रही है।

आदिवासी समाज लगातार मांग करता रहा है कि मंदिर ट्रस्ट में गोंड समाज को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए और बैगा परंपरा को सम्मान मिले।

इससे पहले नवरात्रि के दौरान आंगा देव दान दान पेटी पार कर गर्भगृह प्रवेश कर गए थे और पंचमी भेंट को लेकर भी विवाद हुआ था। उस समय भी आदिवासी संगठनों और मंदिर ट्रस्ट के बीच तीखी बयानबाजी हुई थी और आंदोलन की चेतावनी दी गई थी।

गोंड समाज का कहना है कि मां बम्लेश्वरी धाम से उनकी आस्था और बैगा परंपरा का संबंध सदियों पुराना है।

परंपरा बनाम धार्मिक मर्यादा की बहस

आदिवासी समाज का आरोप है कि मंदिर की मूल लोक परंपराओं को धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है, जबकि ट्रस्ट हमेशा धार्मिक मर्यादा और वैदिक व्यवस्था की बात करता रहा है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से यह बहस जारी है कि मां बम्लेश्वरी धाम की मूल परंपरा क्या रही और मंदिर व्यवस्था में किन समुदायों की ऐतिहासिक भूमिका रही है।

मंदिर ट्रस्ट ने आवेदन लिख कर इस मामले की शिकायत की है
मंदिर ट्रस्ट ने आवेदन लिख कर इस मामले की शिकायत की है

अनुमति के बाद की पूजा:एसडीओपी

डोंगरगढ़ एसडीओपी, केसरी नंदन नायक ने कि बताया 19 मई की घटना है जिसमे जी की अनुमति के बाद जो आदिवासी समाज के कुछ लोग और राजा भवानी बहादुर के राज बैगा किशोर नेताम ने पूजा की अनुमति मांगी थी। जिसमे SDM की अनुमति के बाद, प्रशासन के लोगों ने कहा था की आप यहाँ पर पूजा कर सकते हैं ।

रोपवे के पास उनकी गढ़ माता स्थापित है जहां उन्होंने पूजा शुरू की। इसी दौरान आदिवासी समाज के लोग मंदिर ट्रस्ट के लोगों को पूजा में आमंत्रित कर रहे थे,पर मंदिर ट्रस्ट समिति से कोई भी वहां नहीं पहुंचा । इसी बीच आरोपी राज बैगा किशोर नेताम ने वहां पर मुर्गे की बलि दे दी।

ट्रस्ट समिति की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर आरोपी किशोर नेताम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। मामले की जांच जारी है।

आदिवासी समाज नाराज़,आंदोलन की चेतावनी

अब किशोर नेताम की गिरफ्तारी के बाद यह विवाद फिर गहरा गया है। जानकारी के अनुसार आदिवासी समाज में भारी नाराज़गी है और जल्द राहत नहीं मिलने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी जा रही

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