CG में खल्लारी माता मंदिर में हुए रोपवे हादसे में लापरवाही सामने आई है। जांच में सामने आया है कि, कलकत्ता की जो कंपनी रोपवे का संचालन कर रही थी, वह ब्लैक लिस्टेड है। इसके पहले बिहार-डोंगरगढ़ में हुए हादसे दो कर्मचारियों पर FIR दर्ज जांच शुरू
By Dinesh chourasiya








छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के प्रसिद्ध खल्लारी माता मंदिर में हुए रोपवे हादसे में लापरवाही सामने आई है। जांच में सामने आया है कि, कलकत्ता की जो कंपनी रोपवे का संचालन कर रही थी, वह ब्लैक लिस्टेड है।
‘रोपवे एंड रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड कोलकाता’ कंपनी के कर्मचारियों ने इससे पहले डोंगरगढ़ और बिहार में भी हादसे करवा चुके हैं। राजनांदगांव के डोंगरगढ़ में भी इसी कंपनी के कार्यकाल के दौरान 2016 और 2021 में हादसे हुए थे, जिनमें दो लोगों ने जान गंवाई थी।




बता दें कि खल्लारी में 22 मार्च को श्रद्धालुओं से भरी रोपवे की ट्रॉली टूटकर 20 फीट नीचे खाई में गिर गई थी। हादसे में 1 महिला की मौत और 16 लोग घायल हुए थे। कंपनी के कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। मामले में जांच जारी है।
खल्लारी में दागी कंपनी को रोपवे चलाने की जिम्मेदारी
जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, खल्लारी मंदिर में रोपवे चलाने की जिम्मेदारी ‘रोपवे एंड रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड कोलकाता’ के पास थी। इस कंपनी के प्रबंधन की मॉनिटरिंग में रोपवे संचालन किया जा रहा था।
इस कंपनी ने पूर्व में बिहार के रोहतक और राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में रोपवे चलाने का काम किया है। यहां भी हादसे हो चुके है। 26 दिसंबर 2025 को रोहतास (बिहार) में हुए एक बड़े हादसे के बाद बिहार सरकार ने इस कंपनी को ब्लैक लिस्ट में डाल दिया था।
केबल और मेंटेनेंस में घोर लापरवाही
हादसे के अगले दिन सोमवार (23 मार्च) को पीडब्ल्यूडी (PWD) और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया। प्राथमिक जांच में सामने आया कि रोपवे की केबल और सुरक्षा उपकरणों का तकनीकी परीक्षण लंबे समय से नहीं किया गया था।
विभाग ने कंपनी से सुरक्षा सर्टिफिकेट मांगे हैं, लेकिन प्रारंभिक तौर पर मेंटेनेंस लॉग बुक में कई खामियां मिली हैं। यहां तैनात 6 कर्मचारी प्रशिक्षित इंजीनियर नहीं हैं। कंपनी उन्हें सीधा वेतन तक नहीं देती, वे टिकट की कमाई से अपना हिस्सा काटकर बाकी पैसा कंपनी को भेजते थे।
प्रशासनिक अनदेखी और राजनीतिक संरक्षण
हादसे ने सिस्टम की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मार्च 2024 से यह रोपवे संचालित हो रहा था, लेकिन किसी भी सरकारी विभाग ने इसकी सुरक्षा निगरानी की जिम्मेदारी नहीं ली।
ट्रस्ट कमेटी के अनुसार, क्षेत्रीय विधायक की पहल पर इस कंपनी को खल्लारी लाया गया था। मंदिर ट्रस्ट में तहसीलदार पदेन सदस्य होते हैं, फिर भी सुरक्षा ऑडिट को लेकर कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
पुलिस-SDM की टीम दस्तावेज खंगाल रही
फिलहाल पुलिस ने दो स्थानीय कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की है। एडिशनल डीसीपी और एसडीएम नमिता मारकोले के नेतृत्व में टीम दस्तावेजों को खंगाल रही है।
स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि एक ब्लैक लिस्टेड कंपनी को आखिर किसके इशारे पर श्रद्धालुओं की जान से खेलने की अनुमति दी गई।




