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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का धर्मांतरण रोकने वाले होर्डिंग्स हटाने से इनकार:कहा- धर्म परिवर्तन रोकने पोस्टर लगाना असंवैधानिक नहीं; गांव में पादरी एंट्री-बैन पर PIL खारिज

By Dinesh chourasiya

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कांकेर जिले के कई गांवों में पादरियों और धर्मांतरित ईसाइयों के प्रवेश पर बैन के खिलाफ दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने कहा कि प्रलोभन या गुमराह कर जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए होर्डिंग्स लगाना असंवैधानिक नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि ये होर्डिंग्स संबंधित ग्राम सभाओं ने स्थानीय जनजातियों और सांस्कृतिक विरासत के हितों की रक्षा के लिए एक एहतियाती उपाय के रूप में लगाए हैं। डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ताओं को पेसा नियम 2022 के तहत ग्राम सभा और संबंधित अधिकारी के पास जाने का निर्देश दिया है।

ये बोर्ड कांकेर जिले के ग्राम जुनवानी में लगाया गया है।

गांवों में लगाए गए होर्डिंग्स पर आपत्ति

दरअसल, कांकेर के रहने वाले दिग्बल टांडी और जगदलपुर के रहने वाले नरेंद्र भवानी ने हाईकोर्ट में अलग-अलग जनहित याचिकाएं लगाई थी। जिसमें बताया गया कि जिले के कुदाल, परवी, बांसला, घोटा, घोटिया, मुसुरपुट्टा और सुलंगी जैसे गांवों में ग्राम पंचायतों ने पेसा एक्ट का हवाला देकर होर्डिंग्स लगाए हैं।

होर्डिंग्स में लिखा है कि गांव पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है और ग्राम सभा संस्कृति की रक्षा के लिए पादरियों और धर्मांतरितों को धार्मिक कार्यक्रम या धर्मांतरण के लिए प्रवेश की अनुमति नहीं है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा- संविधानिक अधिकारों का हनन याचिकाकर्ताओं ने कहा कि ग्राम पंचायतों ने पेसा एक्ट का हवाला देकर होर्डिंग्स लगाए हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 19(1)(डी) और 25 का उल्लंघन हैं। उनका यह भी आरोप है कि राज्य सरकार के 14 अगस्त 2025 के सर्कुलर से प्रेरित होकर ये होर्डिंग्स लगाए गए हैं।

यह सर्कुलर हमारी परंपरा हमारी विरासत’ के नाम पर जल, जंगल, जमीन और संस्कृति की रक्षा का आह्वान करता है।

शासन का जवाब- सर्कुलर में नफरत फैलाने या होर्डिग्स लगाने का नहीं है निर्देश

वहीं, राज्य सरकार ने अपने जवाब में तर्क दिया कि याचिकाएं सिर्फ आशंका पर आधारित हैं। राज्य सरकार के सर्कुलर में कहीं भी धार्मिक नफरत फैलाने या होर्डिंग्स लगाने का निर्देश नहीं है।

यह सर्कुलर केवल अनुसूचित जनजातियों की पारंपरिक संस्कृति की रक्षा के लिए है। बस्तर संभाग में स्थानीय आदिवासियों और धर्मांतरित ईसाइयों के बीच विवादों के कारण एफआईआर भी दर्ज हुई हैं।

हाईकोर्ट ने कहा- खतरा महसूस हो तो पुलिस के पास जाएं

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि होर्डिंग्स जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए हैं, यह सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी है। याचिकाकर्ताओं को पेसा नियमों के तहत वैकल्पिक उपाय अपनाने को कहा गया।

साथ ही यह भी कहा गया कि अगर गांव में प्रवेश रोकने या खतरे की आशंका हो तो पुलिस से मदद लें।

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