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CG में बाघिन की दहाड़ से गूंजा जंगल.:वन विभाग ने मरहीमाता जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को किया अलर्ट; आसपास के इलाकों में मूवमेंट

By Dinesh chourasiya

बिलासपुर के अचानकमार टाइगर रिजर्व एरिया में बाघिन का मूवमेंट वीडियो में कैप्चर हुआ है। वन विभाग की ओर से जारी वीडियो में बाघिन रोड क्रॉस करते दिख रही है। दहाड़ने की आवाज भी स्पष्ट सुनाई दे रही है। बाघिन का लगातार आसपास के इलाकों में भटक रही है। जंगल को छोड़कर वो गांव और पर्यटन स्थल के करीब पहुंच रही है। दो दिन से उसे बेलगहना वन परिक्षेत्र के खोंगसरा और भनवारटंक इलाके में देखा गया है।

जिसके चलते वन विभाग ने आसपास के लोगों के साथ ही मरहीमाता जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अलर्ट किया गया है। दरअसल, करीब दो महीने पहले विभाग ने बाघिन को चिरमिरी के जंगल से रेस्क्यू किया था। उसमें जीपीएस सिस्टम के साथ कालर आईडी लगाकर अचानकमार टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया था।

भनवारटंक के जंगल में रोड पर नजर आई बाघिन।

जिससे उसके मूवमेंट का पता लगाया जा सके। वन विभाग के अफसर उसकी लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। यह बाघिन ATR के जंगल में लगातार अपनी जगह बदल रही है। उसके मूवमेंट को देखकर वन विभाग के अफसर चिंतित हैं। क्योंकि, गांव और पर्यटन स्थल पर जाने से आम लोगों के लिए खतरा हो सकता है। मुनादी कराकर किया अलर्ट, पर्यटकों को रोका गया

शनिवार को आसपास के इलाकों में मुनादी भी कराई गई। जिसमें लोगों को जंगल नहीं जाने की सलाह दी गई। साथ ही मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को विशेष सतर्कता रखने और मंदिर के अलावा कहीं आसपास नहीं जाने का भी आग्रह किया गया था।

जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने और वन्यजीवों को किसी प्रकार का व्यवधान नहीं पहुंचाने की चेतावनी दी गई थी। भनवारटंक में मंदिर के अलावा आसपास भ्रमण केंद्र भी है।

मरहीमाता रास्ते को कराया बंद

5 जनवरी को साल का पहला रविवार था। जिस कारण भनवारटंक स्थित मरही माता मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होने की संभावना थी। लेकिन, बाघिन के मूवमेंट को देखते हुए रविवार को वन विभाग ने मरहीमाता मार्ग को बंद कर दिया था। इसके साथ आसपास के क्षेत्र में विशेष निगरानी रखी गई।

 

दोपहर बाद स्थिति सामान्य

बाघिन ने दोपहर 11 बजे के बाद जगह बदल लिया। वो गौरेला-पेंड्रा के बांधघाट होकर मरवाही के जंगल की तरफ चली गई। लोकेशन बदलने के बाद वन विभाग और पुलिस ने रोक हटा दिया और दोपहर 12 बजे के बाद पहुंचने वाले श्रद्धालु और पर्यटकों को जाने की अनुमति दी।

हालांकि इस दौरान उन्हें समझाइश दी गई कि जंगल के अंदर न जाएं। बाघिन जिस तरह विचरण कर रही है, उससे किसी भी समय लौट सकती है। कुछ श्रद्धालु तो दर्शन करने के बाद तत्काल लौट गए।

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