छत्तीसगढ़

साल में करोड़ों रुपए खर्च कर रहे, फिर भी डोर-टू-डोर नहीं उठाया जा रहा है कचरा इसके लिए जिम्मेदार कौन 

By Dinesh chourasiya

चरोदा नगर निगम में यूजर चार्ज लेने की बारी आती है तो सफाई कर्मचारी घर-घर जाकर राशि लेते हैं, लेकिन कचरा उठाने की बारी आती है तो घरों से कचरा नहीं लेते, बल्कि इसके स्थान पर सफाई कर्मचारी चौक या चौराहों पर खड़े होकर सिटी बजाते हैं या फिर सफाई वाला गीत बजाते हैं। इसके बाद जो घर से बाहर आकर रिक्शे में कचरा डाल देते हैं, उसे लेकर चले जाते हैं। इस दौरान कोई पीछे से आवाज भी दे तो उसकी अनदेखी करते हुए चले जाते हैं। जबकि निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी वार्डों को साफ-सुथरा रखने के लिए हर साल 1.26 करोड़ और हर महीने 10.50 लाख रुपए का भुगतान किया जा रहा है। इसके लिए 45 स्व सहायता समूहों की सेवाएं ली जा रही हैं।

इसके लिए निगम ने स्व सहायता समूहों से अनुबंध भी किया है। फिर भी अधिकांश लोगों के निवास में जाकर कचरा नहीं लिया जा रहा है। बस सीटी बजाकर औपचारिकता पूरी कर दी जा रही है। इससे लोगों की परेशानी बढ़ी हुई है। शिकायतों का भी निवारण नहीं हो रहा है। निगम के 40 वार्डों में कचरा कलेक्शन और उसके निष्पादन के लिए साल में करीब 1.26 करोड़ रुपए खर्च किया जा रहा है। हर महीने 10.50 लाख रुपए की राशि खर्च की जा रही है। घरों से कचरा उठाने और उसे सेग्रिगेशन सेंटर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी स्व सहायता समूहों को दी गई है। इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बाद भी नियमत: लोगों के घरों से कचरा सही तरीके से नहीं उठ रहा है।

घरों से गीला और सूखा कचरा अलग करके नहीं दे रहे अनुबंध की शर्तों के अनुसार साइकिल रिक्शा या फिर ई-रिक्शा के साथ एक चालक और दो सफाई कर्मचारियों के साथ वार्डों में जाना है। जिन घरों में बुजुर्ग हैं या फिर जिस गली में रिक्शा नहीं जा सकती है, उन घरों में जाकर सफाई कर्मचारियों को कचरा लेना है और रिक्शे में भरना है। वहीं कचरा देने वालों को सूखा और गीला कचरा अलग-अलग करके देना होगा। लेकिन घरों से भी गीला और सूखा कचरा अलग करके नहीं दे रहे।

अनुबंध की शर्तों के अनुसार समूहों को कचरा उठाना होगा

“अनुबंध की शर्तों के अनुसार प्रत्येक स्व सहायता समूहों को घर-घर जाकर कचरा उठाना होगा। शहर को और वार्डों को साफ-सुथरा रखने और घरों कचरा उठाने की जिम्मेदारी उनकी है। पहले उन्हें चेतावनी दी जाएगी। फिर भी यथा स्थिति बनी रही तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”

-अश्विनी चंद्राकर, सहा. स्वा. अधिकारी

डोर टू डोर कचरा कलेक्शन में हर साल करोड़ों रुपए खर्च

ई-रिक्शा चार्ज करने के लिए पैनल भी बहुत कम निगम में 43 ई-रिक्शा और करीब इतनी ही साइकिल रिक्शा हैं। ई-रिक्शा को चार्ज करने के लिए उमदा श्मशान घाट के पास सेग्रिगेशन सेंटर बनाया गया है। यहीं पर ही ई-रिक्शा को चार्ज करने के लिए करीब 8 लाख रुपए की लागत से पैनल बनाया गया है। फिर भी प्रत्येक ई-रिक्शा चार्ज नहीं हो पाता है। इसकी वजह से अक्सर निर्धारित ई-रिक्शा की तुलना में कम ई-रिक्शा ही चलती है। इसी वजह से अक्सर ई-रिक्शा समय पर नहीं पहुंचती है।

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