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भिलाई में 4 लेबर कोड पर बीएसपी प्लांट के बाहर यूनियनों का प्रदर्शन:पदाधिकारी बोले-मजदूरों को गुलाम बना देगा लेबर कोड, 

By Dinesh chourasiya

केंद्र सरकार की तरफ से अप्रैल 2026 से 4 श्रम संहिताओं को लागू किए जाने के फैसले के खिलाफ देशभर में विरोध तेज हो गया है। गुरुवार को भिलाई इस्पात संयत्र के मुख्य मार्ग पर 7 यूनियनों ने एक साथ आंदोलन किया। इस दौरान मार्ग को रोककर युनियन नेताओं ने अपना विरोध जताया।

मोदी सरकार ने सरेंडर किया, हमर लेबर कोड रद्द करवा कर ही रहेंगे- एक्टू

सेंट्रल ऑफ स्टील वर्कर्स एक्टू के महासचिव विजेंद्र तिवारी ने कहा कि, भारत-अमेरिका डील में मोदी सरकार ने जिस तरह सरेंडर किया है, इस डील को हम रद्द करने की मांग कर रहे है। यह आंदोलन पूरे देश में चल रहा है। इस हड़ताल को सभी संगठन का समर्थन मिल रहा है।

हम चाहते हैं चार लेबर कोड रद्द हो। ठेका प्रथा रद्द किया जाए। निजीकरण बंद हो। देशभर में जिस तरह नफरत फैलाया जा हा है, धार्मिक उन्माद फैलाया जा रहा है, लोगों को बांटा जा रहा है, ये सब बंद होना चाहिए।

लेबर कोड मजदूर को गुलाम बनाने वाला- एटक

भिलाई स्टील मजदूर सभा एटक के महासचिव विनोद कुमार सोनी ने कहा कि, ट्रेड यूनियनों के अनुसार नए लेबर कोड लागू होने पर कार्य अवधि 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे तक की जा सकेगी। महिला कर्मचारियों को भी रात्रि पाली में बुलाने का अधिकार प्रबंधन को मिल जाएगा।

बिना सूचना के एक दिन अनुपस्थित रहने पर 8 दिन का वेतन काटे जाने का प्रावधान होगा। यह लेबर कोड मजदूरों को पूरी तरह से गुलाम बना देगा। फैक्ट्री एक्ट में भी बदलाव कर दिया।

अब कोई परमानेंट नौकरी नहीं मिलेगी, भविष्य भी सुरक्षित नहीं- लोईमू

लोईमू यूनियन के जनरल सेक्रेटेरी सुरेंद्र मोहंती ने कहा कि नए नियमों के मुताबिक 300 से कम कर्मचारियों वाले कारखानों को फैक्ट्री एक्ट के दायरे से बाहर कर दिया जाएगा, जिससे स्थाई आदेश लागू नहीं होंगे और ले-ऑफ के लिए सरकारी अनुमति की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। यूनियनों का कहना है कि स्थाई नौकरियों समाप्त हो जाएगी।

11 प्वाइंट पर लड़ाई लड़ रही यूनियन

भिलाई में इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एक्टू, लोईमू, स्टील वकर्स यूनियन संयुक्त रुप से आंदोलन कर रही है। इन सभी यूनियनों ने यह भी मुद्दा उठाया कि सेल (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) कर्मियों का 2017 से लंबित वेतन समझौता अब तक पूरा नहीं हुआ है और 39 महीने के एरियर भुगतान पर भी संकट है।

इसके अलावा यूनियनों ने चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने, सेल कर्मियों का वेतन समझौता पूरा करने, सार्वजनिक उपक्रमों और खदानों के निजीकरण पर रोक लगाने, स्थाई भर्ती सुनिश्चित करने तथा सभी श्रमिकों के लिए 26 हजार रुपए प्रतिमाह राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन लागू करने समेत 11 मुद्दों पर अपनी मांग रखी है।

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