भिलाई में रबर फैक्ट्री के अंदर कुंआ में मिला गार्ड की लाश पैसा देकर मामला दबाने की कोशिश
By Dinesh chourasiya

भिलाई के जामुल थाना अंतर्गत इंडस्ट्रियल एरिया स्थित उषा रबर फैक्ट्री के कुएं में वहां के गार्ड की लाश मिली। पहले तो परिजनों ने हत्या का आशंका जताई, लेकिन सीसीटीवी फुटेज साफ हुआ गार्ड की मौत कुंआ में गिरने से हुई है।
कंपनी में 70 साल से अधिक उम्र में भी बुजुर्ग को गार्ड की नौकरी पर रखा गया था। सही दिखाई ना देने से यह दुर्घटना हुई। इसके बाद परिजनों को 4 लाख देकर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।







उषा रबर फैक्ट्री में मिली लाश की पहचान उपेन्द्र सिंह के रूप में हुई। उपेंद्र उसी फैक्ट्री में गार्ड की नौकरी करता था। भिलाई इंडस्ट्रियल सिक्यूरिटी सर्विस नाम की एजेंसी ने 70 साल से अधिक उम्र के बाद भी उसे गार्ड की नौकरी पर रखा। फैक्ट्री संचालक ने आंख कम दिखाई दने के बाद भी उसे नाइट ड्यूटी पर रखा।

उसकी ड्यूटी उषा रबर फैक्ट्री में शाम 6 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक यानि 12 घंटे की थी। यहां रात 12 बजे उपेंद्र फैक्ट्री के चारों तरफ जाकर ड्यूटी कर रहे थे। इसी दौरान वो कुंआ की तरफ चल गए। वहां लोहे के एंगल पड़े होने से उन्हें कुआं ठीक से दिखाई नहीं दिया और फैर फिसल जाने से वो सीधे लगभग 12 फिट गहरे कुए में जा गिरे।

सुबह 6 बजे छुट्टी होने के बाद वो घर नहीं पहुंचा तो परिजनों ने फैक्ट्री में पता किया। जब वहां उसकी तलाश की गई तो उसकी लाश कुंआ में तैरती हुई मिली। इसके बाद पुलिस की मौजदूगी में सुबह करीब 10 बजे शव को क्रेन के सहारे बाहर निकाला गया।




परिजनों को शांत कराने दिए गए 4 लाख रुपए
गार्ड के दोनों बेटे और परिवार के अन्य लोग जानकारी मिलते ही रबर फैक्ट्री पहुंच गए थे। वहां उन्होंने फैक्ट्री संचालक के ऊपर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यदि कुंआ को कवर करके रखा जाता तो आज उपेंद्र सिंह जिंदा होते। परिजनों ने फैक्ट्री में हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद कंपनी संचालक आशुतोष तिवारी ने परिजनों को 4 लाख रुपए देकर शांत कराया और मामले को दबाने की कोशिश की गई।
सीसीटीवी फुटेज से हुई दुर्घटना की पुष्टि
जामुल पुलिस ने जब फैक्ट्री में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच की तो पाया कि लक्ष्मी विहार जय अंबे शोरूम के पीछे जामुल वार्ड 4 निवासी उपेंद्र सिंह अपने समय पर ड्यूटी करने शाम 6 बजे पहुंच गया था। रात 12 बजे वो फैक्ट्री के वर्कशॉप वन और टू का दौरा किया फिर पीछे की तरफ चला गया। वहां कुआं के ऊपर लोहे एंगल रखे हुए थे। इन एंगल के बीच में एक से सवा फिट का गैप था, जिससे कुआं से पानी निकाला जाता था।
उपेंद्र सिंह उसी तरफ चले गए और एंगल रखा होने से कुंआ देख नहीं पाए और सीधे कुंआ में नीचे जा गिरे। रात भर कुंआ में पड़े होने से उनकी मौत हो गई। सुबह पानी में तैरती हुई उनकी लाश मिली। लाश को बाहर निकाला गया और पीएम के लिए लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल स्थित मरचुरी भेजा गया।




