
CG के,बलरामपुर में एडिशनल एसपी पर पत्थर और लाठी से हमला, भागकर बचाई जान.. युवक के शव पर जबरन कब्जा करने की कोशिश
By Dinesh chourasiya







बलरामपुर: गुरुचरण मंडल नाम के युवक के थाने में फांसी लगाकर आत्महत्या किये जाने के बाद से उपजा बवाल दूसरे दिन भी जारी रहा। कल सौ से ज्यादा लोगों की भीड़ ने थाने पर हमला बोल दिया था तो वही आज जब मृतक के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराई जा रही थी तब फिर से एक बार भीड़ ने हिंसा की कोशिश की। बताया जा रहा है कि भीड़ ने जिले के एडिशनल एसपी पर लाठी और पत्थरों से हमला कर दिया। इस हमले के बाद एएसपी और दूसरे पुलिसकर्मियों ने भागकर अपनी जान बचाई
नाराज भीड़ ने इसके बाद मृतक गुरुचरण के शव को जबरन कब्जा कर गाँव ले जाने की भी कोशिश की। हालांकि वह इसमें कामयाब नहीं हो पाए। फिलहाल जिला अस्पताल कैम्प्स में तनाव की स्थिति बनी हुई है। यहां बड़ी संख्या में पुलिसबल को तैनात किया गया है। किसी भी तरह की आशंका को देखते हुये दूसरे जिलों से भी बल बलरामपुर बुला लिया गया है।
थाना प्रभारी सस्पेंड




पूछताछ के लिए लाये गये युवक की आत्महत्या और इसके बाद मचे बवाल के बाद गुरुवार देर रात ही सरगुजा आईजी अंकित गर्ग ने बलरामपुर थाने के प्रभारी प्रमोद रूसिया और एक अन्य आरक्षक अजय यादव को सस्पेंड कर दिया था। दोनों पर लापरवाही के आरोप लगे थे।
क्या है मामला?
दरअसल बलरामपुर जिला मुख्यालय के कोतवाली थाना के बाथरूम में गुरुवार को एक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक गुरुचरण मंडल स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी था। बताया जा रहा है कि पुलिस की टीम उसे पिछले लगभग 10 से 15 दोनों से बुलाकर पूछताछ कर रही थी।
जानकारी के अनुसार किसी घरेलू मामले में पुलिस की टीम उससे पूछताछ कर रही थी। गुरुवार को भी उसे थाना में इसी काम से बुलाया गया था लेकिन उसकी लाश फांसी पर झूलती मिली है। मृतक की पत्नी के संबंध में कोई घरेलू मामला थाने में दर्ज था। दावा किया जा रहा है कि पुलिस की टीम इसी मामले में उसे लगातार बुलाकर पूछताछ करती थी।:
थाने में फांसी लगाने की खबर फैलते ही राजनीतिक पार्टी से जुड़े कुछ लोग वहां पहुंचे। उनके साथ कुछ स्थानीय लोग भी शामिल थे। इन लोगों ने पुलिस मुर्दाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। इसके साथ लोगों की भीड़ थाने के बाहर जमा होने लगी। हंगामा बढ़ता ही चला गया। हंगामा करने वालों में महिलाये भी शामिल थी जो पुलिस के वहां पर पत्थरबाजी कर रही थी। इस दौरान पुलिसके जवान अपनी जान बचाने थाने के चट्वपर चढ़े हुए नजर आये।
शुरू हुई सियासत
इस पूरे मामले पर अब सियासत भी शुरू हो गई है। कांग्रेस को फिर से एक बाद प्रदेश की क़ानून व्यवस्था पर निशाना साधने का मौक़ा मिल गया है। इस घटना पर आईबीसी24 से बात करते हुए राज्य की सरकार पर आरोप लगाया गया है कि, प्रदेश में क़ानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। पीसीसी चीफ ने मांग किया कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। इस बात की जाँच होनी चाहिए कि यह हत्या है या आत्महत्या? कहीं पुलिस की पिटाई से मौत तो नहीं हुई? हमें शंका है उसे मारकर फांसी पर लटका दिया गया। कांग्रेस इस घटना को लेकर गंभीर है। हम जांच कमेटी बना रहे हैं। हम जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर जनता का गुस्सा क्यों भड़का?
कांग्रेस की इन्वेस्टिगेशन टीम
: इस पूरे मामले पर कांग्रेस ने आठ सदस्यों वाली जाँच टीम का गठन कर दिया है। इस कमेटी में डॉ. अजय तिर्की को संयोजक बनाया गया हैं जबकि बतौर सदस्य श्रम कल्याण मण्डल के पूर्व प्रमुख सफी अहमद, राजेन्द्र तिवारी, के. पी. सिंह, मधु गुप्ता, लाल साय, सीमा सोनी और दिनेश यादव को शामिल किया गया है।





