दुर्ग में बुजुर्ग महिला से दुष्कर्म के मामले में दोषी को 20 साल सजा:दुर्ग फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सुनाया फैसला, रात में घर में घुसकर दी थी घटना को अंजाम
By Dinesh chourasiya
दुर्ग जिले की फास्ट ट्रैक अदालत ने 65 वर्षीय महिला के साथ घर में घुसकर दुष्कर्म और मारपीट करने के मामले में आरोपी को 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की तीन धाराओं में आरोपी को दोषी ठहराते हुए अलग-अलग सजाएं सुनाईं, जो एक साथ चलेंगी।







फैसले में अदालत ने कहा कि इस तरह के अपराध से घर में अकेली रहने वाली महिलाओं, विशेषकर बुजुर्गों में असुरक्षा और भय का माहौल पैदा होता है।
रात में दरवाजा खुलवाकर घर में घुसा था आरोपी




अभियोजन के मुताबिक, घटना 2 फरवरी 2025 की रात करीब 12 से 12:30 बजे के बीच हुई थी। पीड़िता चुनाव प्रचार से लौटने के बाद अपने घर में सो रही थी। इसी दौरान दरवाजा खटखटाने की आवाज आई। दरवाजा खोलने पर अंधेरे में खड़ा व्यक्ति उसे धक्का देकर घर में घुस आया।
आरोप था कि आरोपी ने महिला के साथ मारपीट की और उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता ने खुद को छुड़ाकर लाइट जलाई, तब आरोपी की पहचान हुई। महिला के चिल्लाने पर आरोपी ने उसे चुप कराने के लिए हाथ-मुक्कों से मारपीट की और शोर सुनकर भाग गया। इसके बाद पीड़िता ने पड़ोस में रहने वाली महिला को घटना की जानकारी दी।
अगले दिन दर्ज हुई थी FIR
पीड़िता की शिकायत पर 3 फरवरी 2025 को धमधा थाने में अपराध क्रमांक 17/2025 दर्ज किया गया। पुलिस ने BNS की धारा 64, 332(बी) और 115(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
विवेचना के दौरान पीड़िता का बयान दर्ज किया गया और उसकी निशानदेही पर घटनास्थल का नक्शा तैयार कराया गया। 4 फरवरी को पीड़िता और आरोपी का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। इसी दिन आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपपत्र न्यायालय में पेश किया।
पीड़िता समेत 11 गवाहों के बयान हुए
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता, उसकी बेटी, पड़ोस में रहने वाली महिला, अन्य गवाहों, पटवारी, चिकित्सकों और पुलिस अधिकारियों समेत कुल 11 गवाहों के बयान दर्ज कराए।
आरोपी ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते हुए खुद को निर्दोष बताया और झूठा फंसाए जाने की दलील दी। हालांकि, अदालत ने सुनवाई और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर उसके खिलाफ लगाए गए आरोप प्रमाणित माने।
तीन धाराओं में सजा, सभी साथ-साथ चलेंगी
अदालत ने आरोपी को BNS की धारा 64 के तहत दुष्कर्म के अपराध में 20 साल का सश्रम कारावास और 500 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर 15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
BNS की धारा 332(बी) के तहत 7 साल का सश्रम कारावास और 100 रुपए जुर्माना लगाया गया। जुर्माना नहीं देने पर 7 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। वहीं, धारा 115(2) के तहत एक साल का सश्रम कारावास सुनाया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि तीनों सजाएं एक साथ चलेंगी।
सजा पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने न्यूनतम दंड देने की मांग की, जबकि अभियोजन पक्ष ने कठोर सजा देने का आग्रह किया।
पीड़िता को आर्थिक सहायता देने की अनुशंसा
अदालत ने अपने फैसले में पीड़िता की सुरक्षा और सहायता को महत्वपूर्ण माना। आर्थिक मदद से पीड़िता को सहारा मिल सकता है, इस आधार पर अदालत ने पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत सहायता दिलाने की अनुशंसा की। इसके लिए निर्णय की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजने का निर्देश भी दिया गया।





