
CG के डोंगरगढ़-मुठभेड़ में MP का जवान शहीद:3 गोली लगने के बावजूद टीम को लीड किया, नक्सली अपना सामान छोड़कर भागे; 2 महीने बाद शादी थी
By Dinesh chourasiya
डोंगरगढ़ और बालाघाट के सीमावर्ती घने जंगलों में हुए नक्सली मुठभेड़ में मध्यप्रदेश हॉक फोर्स के निरीक्षक आशीष शर्मा शहीद हो गए। 19 नवंबर को कुरझेर-बोरतालाब के जंगल में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की संयुक्त टीम तलाशी अभियान पर निकली थी। आशीष शर्मा तीनों टीम को लीड कर रहे थे।
इस दौरान उनका सामना नक्सलियों से हुआ। नक्सलियों ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी, इस दौरान आशीष शर्मा को 3 गोली लगी थी। इस हालत में भी वे आगे बढ़कर अपनी टीम को लीड करते रहे और जवाबी फायरिंग की।







हालांकि इलाज के दौरान उनकी जान चली गई। उनकी नेतृत्व में जवाबी कार्रवाई के बाद नक्सली अपना सामान, राशन पानी सब छोड़कर भाग गए।
अब जानिए पूरी कहानी
डोंगरगढ़-बालाघाट का जंगल नक्सलियों के लिए सालों से एक सुरक्षित ठिकाना रहा है। यहां 18 और 19 नवंबर की रात कुरझेर-बोरतालाब के जंगल में मुठभेड़ हुई।




तलाशी अभियान के दौरान निरीक्षक आशीष शर्मा की पार्टी का सामना नक्सलियों से हो गया और दोनों तरफ से गोलीबारी हुई। जिसमें आशीष को 3 गोली लगी।
इस दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी आशीष शर्मा ने अपनी टीम को निर्देश दिए, तब तक गोलियां चलती रहीं।
जिसके बाद उनकी टीम उन्हें तुरंत जंगल से बाहर लेकर आई, अस्पताल के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया, एयरलिफ्ट तक की व्यवस्था की गई, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।
इंस्पेक्टर की जनवरी में होनी थी शादी
आशीष शर्मा मूल रूप से नरसिंहपुर जिले के रहने वाले थे। कुछ समय पहले हॉक फोर्स ने बालघाट जंगल में चार नक्सलियों को ढेर किया था। इसके बाद उन्हें आउट ऑफ टर्न प्रमोशन देकर निरीक्षक बनाया गया। बताया जा रहा है आशीष शर्मा की शादी तय हो गई थी। दो महीने बाद जनवरी 2026 में शादी होनी थी।
शहीद जवान आशीष शर्मा की उपलब्धि
आशीष शर्मा हॉक फोर्स के उन सक्रिय अधिकारियों में से थे जिनकी कार्रवाइयों ने नक्सली नेटवर्क को कई बार तोड़ा था और वे नक्सलियों के लिए एक जाना-पहचाना नाम थे।
उनकी यही उपलब्धियां थीं कि सुरक्षा बलों में उनका नाम सम्मान से लिया जाता था और नक्सली संगठन उन्हें खुली चुनौती मानते थे। आशीष कई बड़े नक्सलियों का एनकाउंटर कर चुके है।
- हर्राटोला की मुठभेड़ में 14 लाख इनामी नक्सली रूपेश उर्फ हुंगा डोडी को मार गिराया था।
- कदला की मुठभेड़ में 28 लाख की संयुक्त इनामी एसीएम सुनीता और सरिता को ढेर किया था।
- रौंदा के जंगलों में 62 लाख कुल इनामी नक्सलियों- आशा, रजनीता और सरिता को खत्म किया था।
नक्सलियों के निशाने पर थे
जिस तरह निरीक्षक आशीष शर्मा नक्सलियों के खिलाफ कई बड़ी सफलताओं की वजह बने थे, यह मुमकिन है कि नक्सली इकाइयों ने उन्हें निशाने पर लेने की कोशिश की हो। हालांकि आधिकारिक तौर इस बात की चर्चा नहीं है।
मुठभेड़ के बाद नक्सली इतनी जल्दबाजी में थे कि वे अपना कैंप, राशन, बैग और साहित्य छोड़कर जंगल की ओर भाग गए।
दो साल पहले इसी क्षेत्र में 2 पुलिसकर्मियों की हत्या हुई थी
दो साल पहले 2023 में भी इसी बोरतलाव क्षेत्र में नक्सलियों ने दो पुलिसकर्मियों की हत्या की थी।
लगभग दो सालों की शांति के बाद इस मुठभेड़ ने संकेत दिया है कि इस बेल्ट में नक्सली फिर से सक्रियता दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं।
हिड़मा के मारे जाने के ठीक एक दिन बाद की घटना
यह घटना मोस्ट वांटेड नक्सली कमांडर माडवी हिडमा के मारे जाने की खबर के ठीक अगले दिन हुई, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी राहत दी थी। लेकिन डोंगरगढ़-बालाघाट में नक्सलियों ने फिर अपनी सक्रियता दिखाई। जिसे प्रतिशोध के तौर पर देखा जा रहा है।
हिड़मा को बस्तर से लेकर आंध्र और महाराष्ट्र की सीमाओं तक नक्सलियों का सबसे बड़ा और हिंसक चेहरा माना जाता था। उसके खात्मे से संगठन के अंदर भारी हलचल मची थी और कई शीर्ष कमांडर दबाव में आ गए थे।
ऐसे समय में नक्सली आमतौर पर सीमावर्ती क्षेत्रों में अचानक वारदात कर अपनी उपस्थिति और शक्ति का प्रदर्शन किया।




