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भिलाई में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सैकड़ों शिक्षक सड़क पर उतरे:सरकार पर लगाया अन्याय का आरोप, बोले- नौकरी के बदले नौकरी चाहिए

By Dinesh chourasiya

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर भिलाई के सुपेला में सहायक शिक्षकों ने प्रदर्शन किया। नौकरी से निकाले गए सैकड़ों शिक्षकों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ रैली निकाली और नारेबाजी की।

प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सरकार के फैसले का विरोध किया। उनकी मांग थी कि सरकार केवल कमेटी बनाने की बात न करे, बल्कि ठोस निर्णय ले। प्रदर्शनकारियों के हाथ में जो बैनर थे, उनमें लिखा था ‘कमेटी नहीं, कमिटमेंट चाहिए, नौकरी के बदले नौकरी चाहिए’।

सरकार से जल्द बहाली करने की मांग

सहायक शिक्षकों को अचानक नौकरी से निकाला

सहायक शिक्षकों ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने उनके साथ अन्याय किया है। वो लोग अपनी नौकरी वापस पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। वे पूरी तरह से बेरोजगार हो गए हैं। उनके परिवार का गुजर-बसर करना मुश्किल हो गया है।

एक प्रदर्शनकारी शिक्षक ने कहा हमने पूरी ईमानदारी से अपनी सेवाएं दीं। डेढ़ साल तक बच्चों को पढ़ाया, लेकिन अचानक हमें नौकरी से निकाल दिया गया। हम सरकार से मांग करते हैं कि हमारी बहाली की जाए। हमारा परिवार अब भुखमरी के कगार पर है।

क्या है पूरा मामला

सहायक शिक्षक पूर्णिमा ने बताया कि छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षकों की नियुक्ति 2023 में की गई थी। ये शिक्षक B.Ed प्रशिक्षित थे और बस्तर तथा सरगुजा संभाग में पिछले डेढ़ साल से कार्यरत थे। 1 जनवरी 2025 को साय सरकार ने सभी 2900 सहायक शिक्षकों को नौकरी से बाहर कर दिया है।

सरकार का कहना है कि यह निर्णय कोर्ट के आदेश के तहत लिया गया है। सरकार ने शिक्षकों को यह कहकर आश्वासन दिया था कि इस मुद्दे पर विचार करने के लिए एक कमेटी गठित की गई है और जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। लेकिन डेढ़ महीने बीत जाने के बाद भी कोई ठोस समाधान नहीं निकला। इससे शिक्षकों में आक्रोश है।

अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

प्रदर्शन के दौरान नौकरी से निकाले गए शिक्षकों ने सरकार पर कई आरोप लगाए। सहायक शिक्षक निशांत वर्मा ने आरोप लगाया कि यह केवल समय टालने की रणनीति है और सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही है।

सहायक शिक्षकों ने ऐलान किया है कि अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला तो वे अनिश्चितकालीन आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि वे तब तक संघर्ष जारी रखेंगे, जब तक उनकी नौकरी बहाल नहीं होती।

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