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CG में पकड़ाया बिहार का पेपर गैंग:महिला यात्रियों को करते थे टारगेट, पेपर पढने के बहाने उलझाकर चुरा लेते थे जेवर

By Dinesh chourasiya

चलती ट्रेन में महिला यात्रियों को निशाना बनाते थे गैंग के सदस्य। - Dainik Bhaskar

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में RPF और GRP की टीम ने ट्रेन में चोरी करने वाले अंतरराज्यीय पेपर गैंग को पकड़ा है। आरोपियों के पास से चोरी के गहने बरामद किए गए हैं। गैंग के सदस्य पेपर पढ़ने के बहाने ट्रेन में अकेली महिला यात्रियों को उलझाकर उनके सामान को चोरी कर लेते थे।

इससे पहले भी गिरोह के सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जब्त गहनों की कीमत 81 हजार से अधिक की बताई जा रही है। आरपीएफ के अफसरों ने बताया कि इस गैंग के सदस्यों को रायगढ़-बिलासपुर लोकल ट्रेन में हुई चोरी की घटना की जांच के दौरान पकड़ा गया।

आरोपियों से चोरी के गहनों को बरामद कर लिया गया है।

महिलाओं के गहने चुराते थे आरोपी

पूछताछ में पता चला कि संदेही युवकों ने महिला यात्री के लेडीज पर्स की चेन खोलकर उसमें से रखे एक गले का हार, कान की बाली और पाजेब पार किया था। तीनों युवक संदिग्ध रूप से बिलासपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर घूम रहे थे।

बताया जा रहा है कि इसी समय बिलासपुर-टिटलागढ़ लोकल ट्रेन आने वाली थी। इस दौरान आरपीएफ का शक गहराया। आरोपियों से पूछताछ करने पर युवक गोलमोल जवाब देने लगे। सख्ती से पूछताछ के बाद युवक टूट गए। उन्होंने बताया कि वो घूम- घूमकर ट्रेनों से यात्रियों का सामान चोरी करते हैं।

बिहार के रहने वाले हैं तीनों आरोपी

पहले आरपीएफ ने तीनों युवक से सामान्य पूछताछ की, जिस पर पता चला कि अमर कुमार मंडल (35) निवासी ग्राम पाडिया, जिला मुंगेर बिहार, विशाल कुमार पासवान (36) निवासी ग्राम कुमारपुर, थाना बरियारपुर जिला मुंगेर बिहार और सदानंद कुमार मंडल (22) निवासी ग्राम कमरगंज, थाना सुल्तानगंज जिला भागलपुर, बिहार के रहने वाले हैं।

इसलिए पड़ा पेपर गैंग का नाम

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वो किस तरह पेपर पढ़ने के बहाने यात्रियों को उलझाकर उनका सामान चोरी करते थे। तीनों आरोपी एक साथ लोकल और पैसेंजर ट्रेन में चढ़ते और उन महिला यात्रियों को निशाना बनाते थे, जो अकेली या बच्चों के साथ यात्रा करतीं थी।

गैंग का एक सदस्य यात्रा के दौरान महिला यात्री के साथ बैठकर बातचीत में उलझाकर रखता था और दूसरा अखबार पढ़ने के बहाने उसे फैलाकर बैग को ढंक देता। फिर तीसरा सदस्य बैग के पास बैठकर अखबार की आड़ में ट्राली बैग या हैंड बैग को स्क्रू ड्राइवर से खोलकर अंदर रखे सामान को चोरी कर अपने पिट्ठू बैग में रख देता था।

इसके बाद खोले गए बैग की चेन को वापस फेवी क्विक लगाकर चिपका देते थे। इसके साथ ही वेसलीन लगाते हुए चेन को बंद कर देते। घटना को अंजाम देकर तत्काल अगले स्टेशन पर उतर कर भाग जाते थे।

बिहार में बेचते थे सामान, कई बार जा चुके हैं जेल

चोरी के गहनों व सामान को गैंग के सदस्य बिहार के मुंगेर ले जाकर खपाते थे। उनके चोरी के सामान को खरीदने के लिए स्थानीय कारोबारी तैयार रहते हैं। पूछताछ में पता चला कि इससे पहले भी आरोपियों को कई बार गिरफ्तार किया जा चुका है।

पता चला है कि पूर्व में भी वर्ष 2012 से अभी तक कई यात्री सामान चोरी में देश के विभिन्न राज्य जीआरपी मिर्जापुर, जीआरपी जबलपुर, जीआरपी डाल्टनगंज, जीआरपी बरियारपुर, जीआरपी गढरवारा में गिरफ्तार होकर जेल में जा चुके हैं।

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