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दुर्ग में हड़ताल पर अधिकारी-कर्मचारी, सरकारी दफ्तर खाली:11 सूत्रीय मांगों को लेकर धरने पर बैठे शासकीय कर्मचारी, फेडरेशन की चेतावनी- महासंग्राम के लिए तैयार रहे सरकार

By Dinesh chourasiya

छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर दुर्ग जिले समेत पूरे प्रदेश में शासकीय कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रही। 29 से 31 दिसंबर तक चलने वाली इस हड़ताल का असर सरकारी कामकाज पर साफ दिखाई दे रहा है। कलेक्ट्रेट सहित कई प्रमुख सरकारी दफ्तरों में कर्मचारी नदारद रहे, जिससे आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ा।

मंगलवार को दुर्ग कलेक्ट्रेट परिसर में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा। अधिकांश विभागों में ताले लटके नजर आए और जरूरी कामकाज ठप रहा। वहीं दूसरी ओर रायपुर नगर निगम सहित कुछ नगरीय निकायों में कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर काम किया, ताकि आंदोलन के साथ-साथ आम लोगों के जरूरी काम भी प्रभावित न हों। कर्मचारियों का कहना है कि वे जनता को असुविधा में नहीं डालना चाहते, लेकिन अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना मजबूरी बन गया है।

दुर्ग में धरने पर बैठे शासकीय कर्मचारी-अधिकारी।

11 सुत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारी दरअसल शासकीय कर्मचारी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। फेडरेशन का आरोप है कि वर्तमान सरकार को बने दो साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन चुनाव के दौरान किए गए वादों पर अब तक अमल नहीं हुआ। महंगाई भत्ता, वेतन विसंगति, नियमितीकरण और पेंशन जैसे अहम मुद्दों पर सरकार की चुप्पी से कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।

तीन दिवसीय हड़ताल पर 11 मांगों के लेकर हो रहा है प्रदर्शन।

पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट को भी सार्वजनिक करने की मांग कर्मचारी नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार के समान कर्मचारियों और पेंशनरों को देय तिथि से महंगाई भत्ता लागू किया जाए और DA एरियर्स की राशि कर्मचारियों के GPF खाते में समायोजित की जाए। इसके अलावा सभी कर्मचारियों को चार स्तरीय समयमान वेतनमान देने, विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगतियां दूर करने और पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की जा रही है।

संविदा कर्मचारियों का भी उठा मुद्दा हड़ताल के दौरान पंचायत सचिवों के शासकीयकरण, सहायक शिक्षकों और सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों को तृतीय समयमान वेतनमान, नगरीय निकाय कर्मचारियों को नियमित मासिक वेतन व समयबद्ध पदोन्नति जैसी मांगें भी प्रमुख रहीं। साथ ही अनुकंपा नियुक्ति नियमों में शिथिलीकरण, कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने, अर्जित अवकाश नगदीकरण 300 दिवस करने और दैनिक, अनियमित व संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए ठोस नीति बनाने की मांग उठाई गई।

लिखित में सरकार दे जवाब, नहीं तो बड़ा आंदोलन फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी ने कहा कि आज हड़ताल का दूसरा दिन है, कल सरकार महासंग्राम के लिए तैयार रहे। या तो प्रदेश के लीडर को बुलाकर लिखित में आश्वास दें कि हम इस तारीख को व्यवस्थाएं लागू करने जा रहे हैं। सब कुछ लिखित में हो। अन्यथा हम इससे भी बड़ा आंदोलन करेंगे। यदि सरकार ने मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। फिलहाल तीसरे दिन भी हड़ताल जारी रहने के आसार हैं, जिससे सरकारी कामकाज पर असर और गहराने की संभावना है।

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